अमृत-धारा
Amrit Dhara : A bloody love tale
वर्ग (Category) – हिन्दी, प्रेम कथा, रहस्य-रोमांच (Love Story in Hindi, Thriller Story)
लेखक (Author) – सी0 एन0 एजेक्स (C.N. AJAX)
लेखक (Author) – सी0 एन0 एजेक्स (C.N. AJAX)
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Amrit-Dhara : A bloody love tale |
इस काहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं इनका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है । यदि किसी प्रकार की कोई भी समानता पाई जाती है तो यह मात्र एक संयोग होगा ।
जब हमारी आँखों से मासुमियत का चश्मा उतरता है तब जाकर हमें दुनिया के असली रंग का पता तब चलता है वरना हम सभी को खुद की तरह मासुम समझ लेते है पर वास्तव में ऐसा होता नहीं है ।
यह कहानी अमृत नाम के एक लड़के और धारा नाम की एक लड़की है। दोनो का बचपन साथ साथ बीत रहा होता है, पर एक दिन एक भयंकर आंधी आती है जिसकी क्रुर थपेड़े उन दोनो की जिंदगी को तहस नहस कर देती है लेकिन ये जो जिंदगी है उसे भले ही कोई रास्ता दिखाये या नहीं, वो अपना रास्ता खुद ही बना लेती है, पर दो बातें हैं, पहली की यह तय नहीं होता कि कौन सा रास्ता सही है और कौन सा गलत और दुसरी बात यह की कौन तय करेगा कि कौन सा रास्ता सही है और कौन सा गलत ?
ठंडी दोपहरी की भीनी सी धुप जो तन को जलाने के बजाये गुनगुने पानी से स्नान करने जैसा अनुभव देती है, उसमें एक बेहद प्यारी सी मुस्कान लिये नन्हा सा अमृत एक खुबसुरत फुल से आकर्षित हो जाता है जो काँटों से भरे एक पौधे पर लगा था, वो उस फुल को तोड़ना चाहता है पर उसके हाथ वहां उस फुल तक नहीं पहुंच पाते और वह उस फुल को तोड़ नहीं पाता । चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है और उपर इंद्रधुणुषी रंगों से सना नीला आसमान, एक मनमोहक नज़ारा ।
अमृत अपनी मां को आवाज लगाता है - अमृत - माँ ... माँ...मुझे वो फुल चाहिये...यहाँ आओ ना माँ ... माँ...मुझे वो फुल चाहिये ।
अमृत की माँ उसके पास आती है और फुल की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए अमृत से पुछती है - यह फुल तो बेहद खुबसुरत है पर तुम इस फुल का क्या करोगे?
अमृत दुसरी ओर इशारा करते हुये कहता है - मैं यह फुल उसे दुंगा ।
अमृत की माँ (उसके इशारे की दिशा में देखती है और कहती है) - ओ हो तो यह धारा के लिये है !
धारा बेहद प्यारी सी लड़की और अमृत के बचपन की दोस्त जो पास के एक पेड़ से बंधे एक झुले पर झुल रही है।
अमृत की माँ उस फुल को तोड़ने के लिए आगे बढ़ती और जैसे ही फुल को अपने हाथों से पक़ड़ती है तो सारे नज़ारे बदलने लगते है, सारे पेड़ और घास मुर्झाने लगते है और देखते ही देखते हरियाली से भरे नज़ारे आँखों को चौंधिया देने वाले पीली सी तेज रोशनी में बदलने लगती है और इंद्रधुणुषी रंगों से सना नीला आसमान पुरी तरह खुनी लाल से रंग जाता है अमृत यह देख कर डरने लगता है उसे समझ में नहीं आता की यहाँ क्या हो रहा है, उसकी धड़कन तेज़ होने लगती है तभी अमृत की मां की पुकार सुनाई देती है - अमृत...अमृत... बेटा मुझे बचा लो...तुम नहीं बचाओगे तो कौन बचायेगा मुझे ?
अमृत अपनी माँ की ओर देखता है तो पाता है की वह अपनी मां से दुर होता जारहा है, उसके सामने एक भयानक दृष्य होता है जो उसे दहशत से भर देता है । वह देखता की उसकी की माँ जिस पौधे से फुल तोड़ने वाली होती वह पौधा एक विकराल रुप धारण कर लेता और उसकी माँ को अपनी गिरफ्त में लेकर जकड़ता ही चला जाता है उस पौधे के बड़े बड़े कांटे उसकी माँ के शरीर के हर हिस्से में धँसते जा रहे थे ।
अमृत अपनी माँ को बचाने के लिए आगे बढ़ता है तो दुसरी तरफ से चींखने की आवाज सुनाई देती है जो धारा की होती है, अमृत धारा की तरफ देखता है तो पाता है कि धारा की सिर्फ काली परछाई ही बची है जो झुले पर झुल रही है और उसका शरीर दिख नही रहा है । अमृत बेबस सा महसुस करने लगता है और उसकी धड़कन और तेज़ होने लगती है तभी उसे गाड़ी की बेहद तेज़ हॉर्न खुनाई देती है और वह अपने दोनो हाथों से अपने कानों को ढक लेता और अपनी आँखों को भी बंद कर लेता है और अचानक अमृत की आँखे खुलती है तो वह खुद को एक चार पहिये वाहन के आगे की सीट पर बैठा पाता है, उसकी सांसे काफि तेज़ चल रही होती है, वह जैसे ही अपने दाहिने ओर मुड़ता है तो एक और शख्स को गाड़ी की ड्राईविंग सीट पर बैठा देखता है ।
उस शख्स का नाम किंडर है । किंडर अमृत की हालत देख कर पुछता है -
किंडर : तुम ठीक तो हो ?
अमृत (हाँफते हुए): हाँ ...मैं ठीक हुँ बस थोड़ी देर के लिये आँख लग गयी थी ।
किंडर (पानी की बोतल को अमृत की तरफ बढाते हुए): सांस लो ... आराम से और ये लो थोड़ा सा पानी पी लो तुम्हें बेहतर महसुस होगा ।
अमृत (हाँफते हुए ): शुक्रिया ...
किंडर : तुमने फिर वही भयानक सपना देखा न ?
अमृत : हां ...
थोड़ी देर के लिये दोनो शांत हो जाते है, चारो तरफ सान्नाट पसरा होता है और किंडर के अल्फ़ाज़ फिर से सन्नाटे को तोड़ते हैं
किंडर : अमृत तुम्हें अपने बीते हुये कल को भुलना...
अमृत (किंडर को बीच में टोकते हुए) : मैं अपने बीते हुये कल को नहीं भुल सकता हुँ ...यह सपना महज़ एक सपना नहीं एक भयानक हकिकत है जो मेरे अतीत से जुड़ा है और इसी की वजह से मैं आज यहाँ रात के अंधेरे में अपने हाथों में ऑटोमेटीक मशीन गन से साथ इस धने बीयाबान जंगल के बीच खड़ा हुँ और तुम कहते हो मैं अपना अतीत भुला दुँ ?
किंडर : मैं समझ सकता हुँ ... ये आसान नहीं है और फिर मैं तो तुम्हारे दर्द का अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता...(थोड़ी देर रुक कर) अमृत मै बस तुम्हारी थोड़ी सी मदद करना चाहता हुँ दोस्त...
अमृत (थोड़ा रिलेक्स होकर मुस्कुराते हुए): अच्छा तो मदद करना चाहते हो, तो चलो काम की बात करते है ...ये बताओ की हमारे मिशन का स्टेटस क्या है ?
किंडर : अभी तक तो सब ठीक है, नक्सलियों का खेमा एक गाड़ी में अभी यहां से गुजरा है, शायद इस एरिया का मुआएना करने आये होंगें पर सालों ने इतनी तेज़ हॉर्न क्यों बजा दी यह बात समझ में नहीं आ रही है ।
अमृत : क्या?
किंडर : हाँ जो गाड़ी अभी गुजरी उसने तेजी से लम्बा हॉर्न दिया ।
यह सुनकर अमृत को थोड़ी देर पहले वाला सपना याद आ जाता है । अगले पल अपना सिर हिलाता है और किंडर से पुछता है -
अमृत : तुम्हे क्या लगता है यह किसी तरह का संकेत होगा ?
किंडर : पता नहीं कुछ कह नहीं सकते ।
अमृत : उस गाड़ी में एरिया कमांडर था ?
किंडर : नहीं ।
अमृत : समझ मे नहीं आ रहा है कि चल क्या रहा ... वैसे हम इस जंगल की झाड़ियों के पीछे सुरक्षित है ... मैं जब तक इशारा नहीं करुं तब तक अपनी लोकेशन एक्स्पोज़ मत करना ।
किंडर : मतलब ?
अमृत : मतलब की मेरे अलावा किसी को तुम्हारे और इस गाड़ी के बारे में पता नहीं चलनी चाहिये ।
तभी पीछे की झाड़ियो में हलचल होती है, अमृत और किंडर बड़ी फुर्ती से अपनी-अपनी बंदुकें झाड़ियो में हो रही हलचल की दिशा में तान देते है और धीरे धीरे उसी दिशा में आगे बढ़ते है । थोड़ा नज़दिक जा कर वो झाड़ियों हटाते है तो एक फटे-हाल हालत में एक अंजान आदमी दिखाई पड़ता है और वो आदमी अमृत और किंडर को देख कर डर जाता है और गिड़गिड़ाने लगता है -
अंजान आदमी - गोली मत चलाना ..गोली मत चलाना ...मुझे मारना मत...हाथ जोड़ता हुँ ।
किंडर (अपने मुँह पर उगली रख कर इशारा करते हुए ) : श... श... श... श...(वह दबी आवाज़ में कहता है) शांत हो जाओ...शांत हो जाओ...।
वह अंजान आदमी शांत हो जाता है, फिर अमृत उस पर बंदुक तान कर पुछता है -
अमृत : कौन हो तुम और यहां क्या कर रहे हो ?
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ReplyDeleteNice Story sir thank you for share it.
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